
दिल करता खुद से मटरगस्ती, हम दिल से मस्ती क्या करें?
बाज़ार-ऐ-बीचों बीच गुज़रे, वो नज़र झुकाए शर्म से,
हमने मुफ्त उनको जान दी, अब इससे सस्ती क्या करें?
बेवफा भँवरे से तूने, क्यों इश्क किया मेरी कली?
लुट गयी, हाय मिट गयी, मेरे गुल की हस्ती, क्या करें?
दिल को कहते "मत प्यार कर", ना मानता तो धमकाते,
पर दिल मान गया पहली दफा, अब ज़बरदस्ती क्या करें?
सुबह उनकी याद सताए, दिन में आलम संजीदा,
शाम कटे तो कटे क्योंकर, रात है डसती, क्या करें?
वो ज़ालिम थी, वो ज़ालिम है, मंज़ूर हमें है ऐ 'अमन',
पर उस ज़ालिम की सिर्फ एक झलक को, आँख तरसती, क्या करें?
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